"झारखंड: निलंबित IAS विनय कुमार चौबे को आय से अधिक संपत्ति केस में डिफाल्ट बेल"
Suspended IAS Officer Vinay Kumar Choubey Granted
रांची। Suspended IAS Officer Vinay Kumar Choubey Granted, झारखंड में शराब घोटाला केस के बाद अब आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की।
इसका असर यह हुआ है कि इस केस के मुख्य आरोपित निलंबित आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को इस केस में भी डिफाल्ट बेल मिल गया है। हालांकि, इस डिफाल्ट बेल के बावजूद चौबे जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।
वे हजारीबाग में जमीन घोटाला मामले में चार्जशीटेड हैं और उस केस में उनका मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में विनय कुमार चौबे के अलावा दिल्ली के रियल इस्टेट कारोबारी सरदार सुरेंद्र सिंह की भी गिरफ्तारी हुई थी।
चार्जशीट नहीं होने पर डिफाल्ट बेल का लाभ अब सरदार सुरेंद्र सिंह को भी मिल जाएगा। गौरतलब है कि एसीबी ने 24 नवंबर 2025 को कांड संख्या 20/2025 के तहत आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
यह प्राथमिकी निलंबित आइएएस विनय कुमार चौबे के अलावा पत्नी स्वप्ना संचिता, ससुर एसएन त्रिवेदी, साला शिपिज त्रिवेदी, सरहज प्रियंका त्रिवेदी, सहयोगी विनय कुमार सिंह व विनय कुमार सिंह की पत्नी स्निग्धा सिंह के विरुद्ध दर्ज की गई थी।
एसीबी ने यह प्राथमिकी शराब घोटाला व हजारीबाग में जमीन घोटाला केस में जांच में मिले तथ्यों के आधार पर दर्ज की थी।
जांच में एसीबी को जानकारी मिली थी कि विनय कुमार चौबे ने पद का दुरुपयोग कर काली कमाई की, जिसे अपने उपरोक्त सहयोगियों के माध्यम से निवेश किया और उसे सफेद बनाने की कोशिश की। इसके लिए शेल कंपनियां भी बनाईं। एसीबी ने इस केस में भी विनय कुमार चौबे को गिरफ्तार दिखाया था।
15 जनवरी को गिरफ्तार हुए थे सरदार सुरेंद्र सिंह
आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जांच के क्रम में एसीबी ने 15 जनवरी को दिल्ली के रियल इस्टेट कारोबारी सरदार सुरेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया था।
वे उसके बाद से ही न्यायिक हिरासत में हैं। सरदार सुरेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने रांची के लालपुर के मुकुंद अपार्टमेंट स्थित एक फ्लैट को विनय चौबे की सरहज प्रियंका त्रिवेदी को रजिस्ट्री की थी।
वह फ्लैट ज्योतिष एनके बेरा की थी, जिसे पावर आफ अटार्नी के आधार पर सरदार सुरेंद्र सिंह ने वर्ष 2017 में प्रियंका त्रिवेदी के नाम पर 43 लाख रुपये में रजिस्ट्री की थी। एसीबी को शक था कि चौबे के काले धन से ही उक्त फ्लैट की खरीदारी हुई थी।